Computer Network

Computer Network

ऐसे नेटवर्क को, जिसमें एक बड़ा कम्प्यूटर जिससे कि बहुत सारे अन्य ऐसे कम्प्यूटर्स जुड़े हों, जिन पर कार्य करने वाले अपने कम्प्यूटर पर तो कार्य कर ही सकते हैं अपितु उस बड़े कम्प्यूटर की मदद भी ले सकते हों,कम्प्यूटर नेटवर्क कहा जाता है। इसके अन्तर्गत एक बड़े कम्प्यूटर के अन्दर सारा डेटा व सूचनायें भर दी जाती हैं। और उसके साथ अन्य कम्प्यूटरों को भी जोड़ दिया जाता है। अब जुड़े हुए कम्प्यूटर उस बड़े कम्प्यूटर से अपना व उसका डेटा तो शेयर कर ही सकते हैं बल्कि आपस में जुड़े हुए कम्प्यूटर भी अपना उसका डेटा शेयर कर सकते हैं।

इसका लाभ यह है कि सब अपना अपना कार्य तीव्र गति से कर सकते हैं और सारा डेटा व सूचनायें भी एक ही जगह पर सुरक्षित रहती हैं। किसी एक व्यक्ति के अनुपस्थित रहने पर भी कार्य प्रभावित नहीं होता है और कम्प्यूटर की Secondary Memory पर भी अधिक दबाव नहीं पड़ता।

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Data Types

आधनिक कम्प्यूटर द्वारा ग्रहण किये जा सकने वाले आंकड़े चार प्रकार के होते हैं–लिखित (Written); दृश्य (Visual); श्रव्य (Audio) एवं मानवीय अनुभूतियों एवं चेष्टाओं के रूप में।

(1) लिखित आंकड़ों में अंग्रेजी वर्णमाला के सभी छोटे-बड़े अक्षर, अंक, विशेष चिह्नों आदि प्रयोग किया जा सकता है।

(2) दृश्य आंकड़ों में विभिन्न चित्रों एवं फिल्म्स आदि का प्रयोग किया जा सकता है। इनका प्रय स्कैनर एवं सी०डी० अथवा वीडियो कैमेरा द्वारा किया जाता है। आज फिल्मों में विशेष प्रभाव डालने के लिए फिल्म को दृश्य आंकड़ों के रूप में प्रविष्ट किया जाता है और उसके बाद इस पर विशेष प्रभाव डालकर पुनः फिल्म है। रूप में ही आउटपुट प्राप्त किया जाता है। प्रसिद्ध धारावाहिक शक्तिमान में शक्तिमान के गोल-गोल घूमकर किसी भी स्थान पर पहुंच जाना कम्प्यूटर द्वारा ही तैयार किया गया है।

(3) श्रव्य आंकड़ों में ऐसे आंकडे आते हैं, जिनको सुना जा सकता है। इस प्रकार के आंकड़ों को कम्प्यूटर में प्रविष्ट करने के लिए माइक्रोफोन की आवश्यकता होती है।

(4) मानवीय अनुभूतियों एवं चेष्टाओं के रूप में सामान्यतः इस प्रकार के आंकड़ों का प्रयोग चिकित्सा एवं अपराध विज्ञान में किया जा रहा है।

 Types of Network

विस्तार के आधार पर नेटवर्क के तीन प्रकार होते हैं—LAN, MAN तथा WAN।

LAN

इसका पूरा नाम लोकल एरिया नेटवर्क (Local Area Network) है। यह वह निजी नैटवर्क है जो कि एक ही इमारत के अन्दर या किसी स्कूल व कालेज के कैम्पस के अन्दर के लिये प्रयोग किया जाता है। यह निजी कम्प्यूटर्स और कुछ बड़े कम्प्यूटरों को जो कि किसी दफ्तर या किसी औद्योगिक संयंत्र के अन्दर लगे हों और जिसके साथ। कई आउटपुट उपकरण लगे हों, प्रयोग किया जाता है। इसमें जोड़े गये अनेक कम्प्यूटर्स में से केवल एक ही, एक समय पर मास्टर कम्प्यूटर का कार्य करता है।

इस नेटवर्क के अन्दर मुख्यतः प्रयोग करने वाली तकनीक जिसमें कि एक लम्बी केबल के साथ सभी कम्प्यूटर्स को जोड़ दिया जाता है। इसमें डेटा के प्रवाह की गति 10 से 100 MBPS (Mega Byte Per Second) से अधिक होती है साथ ही डेटा के प्रवाह में देरी की सम्भावना ना के बराबर  होती है।

MAN

इसका पूरा नाम मेट्रोपोलिटिन एरिया नेटवर्क (Metropolitan Area Network) है। इस प्रकार का नेटवर्क लैन (LAN) के समान ही होता है, परन्तु इसका विस्तार लैन की अपेक्षा कहीं अधिक होता है। यदि कोई नेटवर्क शहर भर में फैला होता है, तो यह MAN कहलाता है। इस नेटवर्क में भी कम्प्यूटर्स एक शहर के अन्दर ही तारों द्वारा आपस में जुड़े होते हैं, परन्तु बीच-बीच में एम्प्लीफायर्स का प्रयोग किया जाता है, ताकि डेटा नष्ट न हो। यह  भी एक निजी नैटवर्क हो सकता है। आजकल महानगरों में प्रचलित केबिल इन्टरनेट इसी नेटवर्क का एक उत्कृष्ट  उदाहरण है।

WAN

इसका पूरा नाम वाइड एरिया नेटवर्क (Wide Area Network) है। इस तरह के नैटवर्क के लिये बहुत बड़ा । क्षेत्र; जैसे—एक पूरा देश अथवा एक पूरा महाद्वीप; लिया जाता है। इसके अन्दर बहुत-सी कम्प्यूटर मशीनें लगी होती हैं।

इन कम्प्यूटर मशीनों की मेजबान (Host) कहा जाता है। इन मेजबानों को एक छोटे नैटवर्क से जोड़ा जाता है। इस नैटवर्क का कार्य एक मशीन से दूसरी मशीन तक डेटा पहुंचाना होता है। वाईड एरिया नेटवर्क के अन्दर दो मख्य कारक होते हैं-डेटा प्रवाहित के लिये तारें तथा स्विच। स्विच एक तरह के टैन्ड कम्प्यूटर होते हैं, जो कि दो  अथवा दो से अधिक तारों के मध्य में लगे होते हैं। जब एक अन्दर आने वाली तार से डेटा आता है, तो स्विच, उसे डेटा के प्रवाह के लिये उस तार को चुन लेता है, जहां पर वह डेटा जाना होता है। सामान्यतः इन स्विचिंग कम्प्यूटर्स को Router कहा जाता है। वाइड एरिया नेटवर्किंग में सैटेलाइट का प्रयोग भी किया जाता है। प्रत्येक Router का एक एन्टीना होता है जिससे कि यह डेटा का प्रेषण तथा उनको प्राप्त भी कर सकता है।

Internet

वस्तुतः इन्टरनेट अनेक भिन्न-भिन्न नेटवर्स का एक ऐसा नेटवर्क है, जिसमें प्रत्येक नेटवर्क का एक ऐसे  माध्यम से जुड़ा होती है, जो अन्य नेटवर्स से सुचनाओं एवं आंकड़ों का आदान-प्रदान करता है। ये माध्यम इन्टरनेट सेवा प्रदाता के स्वामित्व में हैं। विश्व के प्रमुख इन्टरनेट सेवा प्रदाता हैं-GTI, MCI, स्प्रिन्ट, यूज़नेट और अमेरिका online का ANS। इन्टरनेट की शब्दावली में इन माध्यमों को बैकबोन (Backbone) अर्थात् रीढ़ की हड्डी कहा जाता है जाता है। प्रत्येक बैकबोन में कम-से-कम एक ऐसा बिन्दु होता है, जहां से वह किसी अन्य बैकबोन आंकड़ो का आदान-प्रदान कर सके। इसी कारण जब कोई नेटवर्क किसी बैकबोन से जुड़ता है, तो इस नेटवर्क का प्रयोग करने वाले प्रयोगकर्ता स्वतः ही पूरे सिस्टम से जुड़ जाते हैं। अब ये प्रयोगकर्ता स्वतः ही इन्टरनेट सेवा प्रदाता की सेवा प्राप्त करने वाले किसी अन्य कम्प्यूटर से जुड़ जाता है और इसे संदेश प्रेषित कर सकता है एवं इससे संदेश प्राप्त कर सकता है।

इन्टरनेट के सन्दर्भ में प्रोटोकॉल शब्द से आशय

इन्टरनेट पर सूचनाओं एवं आंकड़ों के आदान-प्रदान के लिए पूर्वपरिभाषित नियम, प्रक्रियाएं एवं सन्धियां हैं, जिन्हें प्रोटोकॉल कहा जाता है। वर्तमान लागू प्रोटोकॉल, आंकड़ा संचरण नियन्त्रण प्रोटोकॉल (Transmission Control Protocol-TCP) या इन्टरनेट प्रोटोकॉल (Internet Protocol-IP) है। ये दोनों मिलकर इन्टरनेट की भाषा का निर्माण करते हैं जिसे एस्पेरेंटो (Esperanto) कहा जाता है। इन्टरनेट से जुड़ने वाला प्रत्येक कम्प्यूटर इन दोनों प्रोटोकॉल को समझता है और नेटवर्क से जुड़े दूसरे कम्प्यूटर्स से सूचनाएं एवं आंकड़े प्राप्त करने अथवा भेजने के लिए इनका प्रयोग करता है। TCP का कार्य प्रत्येक सूचना एवं आंकड़े को छोटे टुकड़ों, जो पैकेट कहलाते हैं, में बांट देना है। प्रत्येक पैकेट पर भेजने वाले का नाम व पता लिखा होता है। अब IP का यह कार्य होता है, कि इन पैकेट्स को विभिन्न सम्भावित रास्तों में से किस रास्ते से उसके लक्ष्य तक पहुंचाया जाए।

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Domain Name System-DNS

इन्टरनेट से जुड़े प्रत्येक कम्प्यूटर का एक विशेष नाम होता है। यह इस रूप में होता है — www.NAME.COM । यह वास्तव में इस कम्प्यूटर का पता होता है। पते की यह प्रणाली क्षेत्र नाम प्रणाली (Domain Name System-DNS) कहलाती है। प्रत्येक DNS पते के न्यूनतम दो भाग होते हैं, जो एक बिन्दु (.) द्वारा विभक्त होते हैं। इस नाम में सबसे पहले या दो-तीन अक्षरों में क्षेत्र का नाम होता है या फिर दो अक्षरों में भौगोलिक कोड। बिन्द के दायीं ओर इस पते का प्रयोग करने वाली कम्पनी अथवा एजेन्सी अथवा संगठन का नाम होता है।

Master Name Server

इन्टरनेट के विस्तार को देखते हुए इसके विकास के लिए बनाई गई इन्टरनेट । को आठ एक-दूसरे से सर्वथा भिन्न श्रेणियों में विभक्त किया है। इन आठ श्रेणियों के लिए। (DNS), जो कि मास्टर नेम सर्वर कहलाती है, को इन्टरनेट से जोड़ा गया। मास्टरनेम सव क नाम व IP Addresses के आंकड़ों को अपने पास रखता है और नाम को IP Address में परिव कम्प्यूटर से सम्पर्क स्थापित करता है। ये आठ श्रेणियां निम्नानुसार हैं—

(1) .com—यह सर्वाधिक प्रचलित DNS है। इसका प्रयोग व्यापारिक क्षेत्र के लिए किया जाता है अर्थात जिस Address के अन्त में .com लगा हुआ हो, वह किसी व्यापारिक संगठन का पता होता है; जैसे www.microsoft.com/

(2) .edu—यह शैक्षणिक संस्थाओं के लिये निर्धारित किया गया DNS है अर्थात् जिस Address के अन्त में .edu लगा हुआ हो, वह किसी शैक्षणिक संस्था का पता होता है; जैसे-www.Oxford.edul

(3) .mil-यह अमेरिकी सेना संस्थान के लिये निर्धारित किया गया DNS है।

(4) .gov—यह अमेरिकी सरकार के लिये निर्धारित किया गया DNS है। इस डोमेन के अन्तर्गत अमेरिकी सरकार के मन्त्रालय को सम्मिलित किया गया है।

(5) .org–यह किसी ऐसे संगठन के लिये निर्धारित किया गया DNS है, जो कि व्यापारिक क्षेत्र में नहीं है अर्थात् जिस Address के अन्त में .org लगा हुआ हो, तो वह Address एक ऐसे संगठन का होता है, जो व्यापारिक कार्य नहीं करते हैं; जैसे— www.ilo.org, यह Address अन्तर्राष्ट्रीय श्रमिक संघ का है, जो कि संयुक्त राष्ट्र संघ के अन्तर्गत आता है।

(6) .net यह नेटवर्क्स के लिये निर्धारित किया गया DNS है अर्थात् जिस Address के अन्त में .net लगा हुआ हो, तो वह Address कि नेटवर्क का होता है; जैसे—WWW.internic.net अथवा www.domen.net ।

(7) .int—यह अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों के लिये निर्धारित किया गया DNS है; जैसे— www.tpc.int ।

(8) आठवें प्रकार का DNS विभिन्न राष्ट्रों के लिये निर्धारित किया है। यह DNS सामान्यत: दो अक्षरों में प्रयोग किया जाता है; जैसे—.in भारत के लिए, .uk ब्रिटेन के लिए, .au आस्ट्रेलिया के लिए आदि। अत: यदि हम Address में दो अक्षरों का कोई Address देखें तो, यह समझ लेना चाहिए कि वह किसी राष्ट्र विशेष का DNS है ।

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Working of Internet

इन्टरनेट एक समस्त संसार में फैला हुआ ऐसा नेटवर्क है, जिस पर किसी का भी स्वामित्व नहीं है। इन्टरनेट नियन्त्रण संगठन ने विश्वभर में इन्टरनेट कनेक्शन्स प्रदान करने के लिये प्रत्येक देश में कुछ इन्टरनेट सेवा प्रदाता Internet Service Provider) जिन्हें आम बोलचाल में ISP कहा जाता है, नियुक्त किये हुए हैं। भारत का प्रमुख ISP वा संचार निगम लिमिटेड (VSNL) है। VSNL विभिन्न टेलीफोन विभागों तथा अन्य प्राइवेट कम्पनीज को कनेक्शन पटान करता है, जो कि इन्टरनेट प्रयोगकर्ता को कनेक्शन उपलब्ध कराती हैं। प्रयोगकर्ता को इन्टरनेट का कनेक्शन लेने के लिये दो प्रकार के कनेक्शन्स उपलब्ध होते हैं—डायल-अप (Dial-up) तथा लीज़ लाइन (Lease Line)।

प्रयोगकर्ता को डायल-अप कनेक्शन के अन्तर्गत अपने कम्प्यूटर से अपने ISP द्वारा दिया गया एक विशेष | टेलीफोन नम्बर डॉयल करना होता है। जब यह फोन दिये गये नम्बर पर मिल जाता है, तो प्रयोगकर्ता तथा ISP के कम्प्यूटर आपस में जुड़ जाते हैं और प्रयोगकर्ता का कम्प्यटर परोक्ष रूप से इन्टरनेट से जुड़ जाता है। अव प्रयोक्ता इन्टरनेट के किसी भी कम्प्यूटर का पता लिखकर उससे जुड़ सकता है, डेटा का लेन-देन कर सकता है। डॉयल कनेक्शन के लिए विभिन्न ISP के द्वारा अलग-अलग फीस निर्धारित की गई है। ये सभी फीस एक साल या निघारत घण्टों, इनमें से जो भी पहले खत्म हो जाता है, तक होती है। लीज लाइन प्रकार के इन्टरनेट कनेक्शन की कीमत काफी अधिक होती है क्योकि इसमें प्रयोगकर्ता के लिये अलग से ही केबिल लाइन खींची जाती है। इसमें प्रयोगकर्ता का कम्प्यूटर इन्टरनेट से सदैव जुड़ा रहता है तथा उसे कोई फोन नम्बर डॉयल नहीं करना होता। जब भी प्रयोगकता अपने कंप्यूटर को इन्टरनेट से जोड़ता है, तो दोनों ही प्रकार के इन्टरनेट कनेक्शनों में उनकी फीस के अतिरिक्त एक स्थानीय कॉल भी लगती है।

Services Available on Internet (E-Mail)

ई-मेल (E-Mail)  ई-मेल का पूरा नाम इलेक्ट्रॉनिक मेल (Electronic Mail) है। मेल का अर्थ है डाक अर्थात् डाक के इलेक्ट्रोनिक रूप में एक कम्प्यूटर से दूसरे कम्प्यूटर में स्थानान्तरित होने को इलेक्ट्रॉनिक मेल कहा जाता है। यह इन्टरनेट उपलब्ध एक अत्यन्त महत्वपूर्ण एवं लोकप्रिय सेवा है। इन्टरनेट का प्रयोगकर्ता इसका सर्वाधिक उपयोग ई-मेल सेवा प्रदाता से इस सुविधा को प्रयोगकर्ता द्वारा मांगने पर, ई-मेल सेवा प्रदाता अपने केन्द्रीय कम्प्यूटर में डिस्क में थोड़ा-सा स्थान प्रदान करता है, जहां पर प्रयोगकर्ता की आने वाली ई-मेल्स को रखा जाता है। इस स्थान को मेल बॉक्स (Mail Box) कहा जाता है। प्रत्येक मेल बॉक्स का एक पता होता है, जो कि ई-मेल पता Address) कहलाता है। यदि किसी व्यक्ति को ई-मेल भेजनी है, तो उस व्यक्ति का ई-मेल पता ज्ञात होना आवश्यक है। हॉटमेल, (Hotmail), याहू (Yahoo), रेडिफमेल (Rediffmail) आदि अनेक ऐसे ऐसे इन्टरनेट सर्वर हैं जो  मुफ्त में ई-मेल भेजने, पाने तथा अपना एकाउन्ट बनाने की सुविधा उपलब्ध कराते हैं।

On-Line Communication

जब दो इन्टरनेट प्रयोगकर्ता अपने सन्देशों का आदान-प्रदान एक ही समय में एक साथ कर रहे हों, तो यह  ऑन-लाइन कम्यूनिकेशन कहलाता है। ई-मेल को हम ऑफ लाइन कम्युनिकेशन के रूप में समझ सकते हैं। ई-मेल में हम अपने कम्प्यूटर पर संदेश लिखकर उसे पते के साथ किसी व्यक्ति के मेल-बॉक्स में भेज देते हैं। हमने जिस व्यक्ति को ई-मेल भेजा है, वह व्यक्ति, जब चाहेगा तब हमारा भेजा गया सन्देश पढेगा ।

इस प्रकार दोनों में एक ही समय में सन्देशों का आदान-प्रदान नहीं होता है। ऑन लाइन कम्यूनिकेशन में सन्देश भेजने वाला तथा सन्देश पाने वाला व्यक्ति एक ही समय में इन्टरनेट से जुड़े होते हैं तथा भेजने वाला व्यक्ति, जो सन्देश अपने कम्प्यूटर में टाइप करता है, वह पाने वाले व्यक्ति के कम्प्यूटर मॉनिटर पर प्रदर्शित होता है।

इस प्रकार की सुविधा को कम्प्यूटर की भाषा में चैटिंग (Chatting) कहा जाता है। ऑन लाइन कम्यूनिकेशन की सहायता से पृथक्-पृथक् शहरों, देशों में  बैठे व्यक्ति आपस में मीटिंग भी कर सकते हैं। ये लोग एक समय सुनिश्चित कर लेते हैं, और उस समय पर सभी इन्टरनेट से जुड़कर किसी एक ISP द्वारा दी जाने वाली चैटिंग की सुविधा का उपयोग करते हुए आपस में सन्देशों का आदान प्रदान उसी समय, टाइप करके अथवा माइक पर बोल कर सकते हैं।

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Dear Students, CCC Online Test के Preparation के Purpose से यह 30 Question English में  है । इसमें  CCC Exam में पूछे जाने वाले Question का Collection है । प्रत्येक Question का Answer देने पर एक Point मिलेगा । एवं पास होने के लिए 50% Marks लाना अनिवार्य है । Test को शुरू करने के लिए Start Button पर Click करना होगा । इसके सभी Question के Answer देने होंगे । Last में जाकर Finish Button पर Click करना होगा उसके बाद आपका Result Screen पर दिखाई देगा ।

World Wide Web: www

इन्टरनेट पर अपने, अपने व्यवसाय, अपने द्वारा दी जाने वाली सेवाओं तथा अपने प्रतिष्ठान के बारे में विभिन्न  सूचनायें पब्लिश करने के लिये वेबसाइट का निर्माण करना होता है। इन्टरनेट द्वारा प्रदत्त इस सेवा का उपयोग करने के लिये प्रयोगकर्ता को सर्वर पर स्थान लेना होता है। इसके लिये प्रयोगकर्ता को प्रतिवर्ष कुल फीस भी देनी होता है।

कल सर्वर अभी इस सेवा को नि:शुल्क भी उपलब्ध कराते हैं। इस स्थान को वेबसाइट कहा जाता है। प्रत्ये वेबसाइट का एक पता होता है। जिस व्यक्ति को यह पता मालूम है वह उस वेबसाइट पर जाकर उन सूचनाओं का लाभ उठा सकता है। वेबसाइट में सिर्फ सूचनाएं लिखी या पढ़ी जा सकती हैं। ई मेल भेजे या प्राप्त नहीं किये जा सकते हैं। आज विश्व के कई प्रमुख अखबारों तथा पत्रिकाओं की अपनी वेबसाइट हैं, जहां जाकर हम समाचार सूचनाएं पढ़ सकते हैं।

Internet Tools

ऐसे सॉफ्टवेयर्स जो कि कम्प्यूटर के इन्टरनेट से जुड़ने पर उसमें सर्फिग करते हुए एक वेबसाइट से दूसरी वेबसाइट पर जाने तथा इन्टरनेट की अन्य सुविधाओं का प्रयोग करने के लिए जिन सॉफ्टवेयर्स का प्रयोग किया जाता है, उन्हें इन्टरनेट टूल्स कहा जाता है।

Browser

ब्राउजर ही एक ऐसा साधन है, जो कम्प्यूटर को इन्टरनेट से जोड़ता है। यदि सामान्य भाषा में कहा जाए तो ब्राउजर एक ऐसा सॉफ्टवेयर है, जो हमारे कम्प्यूटर को इन्टरनेट से जोड़ने में मदद करता है। ब्राउजर के अभाव में इन्टरनेट से चित्र, टैक्स्ट, संगीत, ग्राफिक्स आदि देखने व सुनने की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

नेटस्केप नेवीगेटर और इन्टरनेट एक्सप्लोरर दो ऐसे ब्राउजर हैं, जिनको क्रमशः नेटस्केप और माइक्रोसॉफ्ट कॉरपोरेशन ने विकसित किया है। इन दोनों ब्राउजर्स का कार्य हमारे कम्प्यूटर को इन्टरनेट से जोड़ना है। इन्टरनेट के विकास के साथ-साथ इन ब्राउजर्स का विकास हो रहा है।

आज के ब्राउजर प्रोग्राम पुराने ब्राउजर्स की अपेक्षा अधिक उन्नत एवं तीव्र गति से कार्य करने वाले हैं। पुराने जिस में इमेज, एनीमेशन आदि का प्रयोग नहीं किया जा सकता था। ये टैक्स्ट ब्राउजर्स कहलाते हैं, परन्तु विन्डोज ऑपरेटिंग  सिस्टम के आते ही ब्राउजर्स भी विन्डोज के वातावरण में कार्य करने वाले बनने लगे अर्थात इनमे चित्र आदि का भी प्रयोग किया जाने लगा और वेब ब्राउजर का विकास हुआ।

Search Engine

इन्टरनेट की किसी वेबसाइट पर स्थित एक ऐसा एप्लीकेशन, जिसकी सहायता से प्रोयोग्कर्ता किसी अन्य वेबसाइट का पतः ज्ञात कर सकता है Search Engine कहलाता है ।

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