History of Computer

History of Computer

कंप्यूटर का इतिहास बहुत पुराना है इसकी प्रारंभिक शुरुवात तब हुई, जब मनुष्य ने गिनने के लिए उंगलियों का प्रयोग किया । उँगलियों पर गाणनाये  बहुत कम मात्र में की जा सकती थी । इसके बाद शिकारियों को यह जानने की इच्छा रहती थी की उन्होंने कितने जानवरों, पक्षियों आदि का शिकार किया । इसके लिए मनुष्य ने मिटटी की दीवारों पर पशु पक्षियों के चित्र बनाने शुरू किये ।

इसके बाद 650 बी.सी. में इजिप्ट के निवासियों (Egyptians) ने पशु पक्षियों की आकृतियों को एक विशेष प्रकार के चिन्हों द्वारा गुफाओं में बनाया । ये लोग इन चिन्हों को एक विशेष विधि द्वारा गिनने के काम लाते थे । इसके बाद मनुष्य ने गिनने के लये अनेक युक्तियों को खोजा । लेकिन कोई भी युक्ति मनुष्य के लिए कारगर सिद्ध नहीं हुई ।

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इसके बाद सबसे आधुनिक गणनात्मक युक्ति अबाकस (Abacus) का अविष्कार सोलहवीं शब्तादी में चीन में हुवा । यह एक लकड़ी का आयताकार फ्रेम होता है । इस फ्रेम को दो भागों में बांटा  गया है । अबाकस का पहला भाग छोटा तथा दूसरा भाग बड़ा रखा गया । इस फ्रेम  में बाईं ओर के सिरे से दाहिनी ओर के सिरे तक मध्य छड को पार करते हुए तार लगे रहते थे । इन तारों में मोती पिरोये जाते थे । इस अबाकस ने गणित वेशेषज्ञो को नई दिशा प्रदान की और इसका प्रयोग चीन के साथ-साथ रुस आदि देशों में होने लगा । इन देशों ने अपनी सुविधानुसार अबाकस के ढाचे में कुछ परिवर्तन किये जैसा की चित्र में दर्शाया गया है । अबाकस बड़े भाग को अर्थ (Earth) और छोटे भाग को हैवन (Heaven) कहते हैं ।

History of Computer

चीन में अबाकस का सबसे अधिक प्रयोग किया जाता है । इस अबाकस के लकड़ी के फ्रेम के छोटे भाग की प्रत्येक पंक्ति में दो-दो मोती होते थे और इस भाग के प्रतेयक मोती का मान पांच होता था । प्रत्येक पंक्ति के बड़े भाग में पांच-पांच मोती होते थे तथा इस भाग के प्रत्येक मोती का मान एक होता था । अब हमें जो संख्या लिखनी है, उस क्रम का मोती खिसकाकर मध्य छड़ के पास ले आते थे । ऊपर से निचे की ओर  प्रत्येक पंक्ति क्रमवार इकाई, दहाई, सैकड़ा, हजार, दस हजार, लाख प्रदर्शित करती है ।

यदि हमें अबाकस पर 761891 (सात लाख इकसठ हजार आठ सौ इक्यानवे) प्रदर्शित करता हो तो हम लाख वाली पंक्ति में बाईं ओर से एक मोती जिसका मान पांच एवं दाहनी ओर से दो मोती जिसमे प्रत्येक का मान एक-एक होता है, उन्हें मध्य छड़ की ओर खिसका देंगे । इस प्रकार हमारे अबाकस पर सात लाख प्रदर्शित होगा । अब दस हजार वाली पंक्ति में छ: लिखने के लिए बायीं ओर से एक मोती और दाहिनी ओर से भी एक मोती मध्य छड़ के पास लायेंगे । अब हजार वाली पंक्ति में एक लिखने के लिए सिर्फ दाहनी ओर से एक मोती मध्य छड़ की ओर खिसकाएंगे । क्यूंकि दाहिनी ओर के एक प्रत्येक मोती का मान एक होता  है । इस प्रकार हमारे अबाकस पर 761000 प्रदर्शित होगा । अब हम अबाकस पर सैकड़े वाली पंक्ति में आठ लिखने के लिए बायीं ओर से एक मोती एवं दाहिनी ओर से तीन मोती मध्य छड के पास लायेंगे क्यूंकि बायीं ओर के एक मोती का मान पांच  और दाहिनी ओर के प्रत्येक मोती का मान एक है । इस प्रकार सैकड़े वाली पंक्ति में मध्य छड के पास आये मोतियों का मान आठ हो जायेगा । इस प्रकार हमारे अबासक पर 761800 प्रदर्शित होगा । अब हमें दहाई वाली पंक्ति में नौ लिखने के लिए बायीं ओर से एक मोती एवं दाहिनी ओर से चार मोती मध्य छड के पास लाने होंगे । क्यूंकि पांच और पांच का योग नौ होता है । इस प्रकार हमारे अबाकस पर 761890 प्रदशित होगा । अब इकाई वाली पंक्ति में एक लिखने के लिए हम दाहिनी ओर से एक मोती मध्य छड के पास लायेंगे । इस प्रकार हमारे अबाकस पर 761891 पद्रषित होगा ।

अब हमें जो संख्या जोड़नी है, उस संख्या के बराबर मोती मध्य छड के  पास लायेंगे । यदि हमें अबाकस पर प्रदर्शित संख्या में से कोई संख्या घटानी है हम उस स्संख्या के बराबर मोती मध्य छड़ के पास हटा देंगे । इस प्रकार अबाकस पर जो संख्या प्रदर्शित होती है वही संख्या हमारी गड़ना का परिणाम होगा ।

चीन में अबाकस का आज भी प्रयोग किया जाता है । बहुत से विधार्थी Calculator की अपेछा अबकास द्वारा गड़ना सरल मानते हैं और प्रतियोगिताओ में अबाकस द्वारा गड़ना तेज गति से कर परिणाम शीघ्र प्राप्त किये जाते रहे हैं ।

सन 1617 में स्कॉट के गणितज्ञ सर जाँन नेपियेर ने एक युक्ति का आविष्कार किया, जिसे नेपियेर बोन के नाम से जाना जाता था इसमें दी संख्याओं से संबंधित छड़ो को पास-पास रख कर गणितीय संक्रियाए की जाती थी इस युक्ति द्वारा जोड़, घटा, भाग बड़ी सरलता से किया जा सकता था इस युक्ति ने Analogue कंप्यूटर तैयार करने में सहायता प्रदान की । इस युक्ति के कुछ समय पश्चात Odometer की खोज की गई; जिसे अब Speedometer के नाम से जाना जाता है  ।

ब्रिटिश आविष्कारक और  गणितज्ञ चार्ल्स बावेज (1791-1871) ने पहली बार संपूर्ण कंप्यूटर की कल्पना की । चार्ल्स का जन्म एक संपन्न परिवार में हुआ । उनके जीवन का उद्देश्य एक आदर्श परिकलन यन्त्र का अविष्कार करना था । इस उद्देश्य के लिए उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन और धन अर्पण कर दिया ।

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Development of Computer

कंप्यूटर के विकाश की प्रक्रिया सन 1946 के बाद से आज तक लगातार चल रही है । जैसे-जैसे इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों में विकास होता गया, वैसे-वैसे कंप्यूटर के विकास का नया चरण प्रारंभ होता गया है । कंप्यूटर के विकास के बारे में जाकारी प्राप्त करने से पहले हमें कंप्यूटर मानक डिजाईन के बारे में जानकारी होनी चाहिए –

वान न्यूमेन का कंप्यूटर मानक डिजाईन—सन 1946 में कैंब्रिज विश्विद्यालय में प्रशिद्ध गणितज्ञ जान वान न्यूमेन की अध्यक्षता में ‘ इलेक्ट्रॉनिक (डिजिटल) Computers के डिजाईन’ विषय पर की गई चर्चा में उस समय के कंप्यूटर विषेशज्ञो द्वारा कंप्यूटर से जुडी हुई अग्रलिखित आवश्यक्ताओं पर विशेष बल दिया गया—

 Generation of Computers 

प्रथम इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर का निर्माण 1946 में किया गया । इसके बाद वर्तमान समय के कंप्यूटर तक जो भी सुधार हुए, उनको चार भागों में बाटा गया है ।  जिसे कंप्यूटर पीढ़ी (Computer Generation) कहा जाता है । कंप्यूटर की पीढ़ी का वर्गीकरण कंप्यूटर में लगे मुख्य पुर्जो, जिन्होंने कंप्यूटर का स्वरूप बदल दिया, को आधार मान कर किया गया है । कंप्यूटर में प्रयोग किये गए मुख्य इलेक्ट्रॉनिक पुर्जो के आधार पर कंप्यूटर के विकाश के चारणो को निम्नांकित पांच पीढ़ीयों में बाटा गया है—

First Generation of Computer

1946 में संयुक्त राज्य अमिरिका में पेंसल्वेनिया विश्वविद्यालय में विशालकाय ‘ईनैक  नाम का इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर स्थापित किया गया । ENIAC  का पूरा नाम ( Electronic Numerical Integrator and Calculator) था ।

इस कंप्यूटर में Diode वाल्व का प्रयोग किया गया था, जिसके अत्यधिक उष्मीय उत्सर्जन होता था एव कंप्यूटर शीघ्र ही गरम हो जाता था ।

Second Generation Computer

विलियम शाॅकली नाम के वैज्ञानिक  एव उनके दल ने सन 1948 में संयुक्त राज्य अमेरिका की (Bell) Laboratory में ट्रांजिस्टर नाम के इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे का अविष्कार किया । इस सूक्ष्म परन्तु इलेक्ट्रान नलिकाओं की तुलना में कही अधिक सुचारू और कहीं अधिक टिकाऊ युक्ति ने अन्य इलेक्ट्रॉनिक उप्करणो की भाति कंप्यूटर के क्षेत्र में एक दम क्रांति ला दी । ट्रांजिस्टरो को बनाने के लिए अर्ध चालक पदार्थो जैसे — सिलिकोन, जर्मेनियम आदि का प्रयोग किया । ये पदार्थ ऊष्मा उत्सर्जित नहीं करते थे ।

सेंकंड जनरेशन के कंप्यूटर निम्लिखित थे — UNIVAC 1108, RCA 501, IBM-700, 1401, 1620,7094, C.D.C.-1604,3600, LEOMARK-III,ATLAS और ICC-1901 ।

Third Generation Computer

इस पीढ़ी के कंप्यूटर में ट्रांजिस्टर  के स्थान पर I.C. (Integrated Circuit) का प्रयोग किया । यह सैकड़ो Component का कार्य स्वय एकेले कर सकती थी । अतः यह कंप्यूटर second generation के तुलना में काफी छोटे आकार के बन गए और इन कंप्यूटर का वजन भी पहले के कंप्यूटर की अपेक्षा कम हो गया ।

इस पीढ़ी के मुख्य कंप्यूटर थे – I.C.L.-2903, C.P.C 1700, P.D.P.-11/45 ।

Fourth Generation Computers

सम्पुर्ण  विश्व में इस समय तक कंप्यूटर को और अधिक छोटा एव उपयोगी बनाने की होड़ मच गई, और इस प्रकार सन 1947 में कंप्यूटर का सर्वाधिक विकास हुआ ।

इस समय जो कंप्यूटर बनाये गए उसमे I.C.(Integrated Circuit) के स्थान पर और अधिक component की क्षमता रखने वाली माइक्रोप्रोसेसर का प्रयोग किया गया । एक माइक्रोप्रोसेसर अनेक I.C. का अर्थ अकेले ही कर सकता था । इस वजह से कंप्यूट का आकार और छोटा और उनकी ऊष्मा उत्सर्जन की क्षमता न के बराबर हो गई थी । यह माइक्रोप्रोसेसर गड़ना स्मृति भंडार और तार्किक कार्य भी कर सकता था । इस पीढ़ी के कंप्यूटर गणना के अतिरिक्त अनेक कार्य जैसे — हिंदी, अंगेरजी आदि भाषा में मुद्रित करना, चित्र बनाना ध्वनि तैयार करना आदि भी कर सकते थे । इस पीढ़ी के कंप्यूटर निम्न प्रकार हैं —-

COMMADOR-PET, D.C.M.-TANDY, Z.X.SPECTRUM, IBM-PC आदि ।

Fifth Generation Computer

इन कंप्यूटर की रचना समान्तर डिजाईन की होगी और यह दिए गए निर्देशों के अनुसार प्राप्त जानकारी को विश्लेषण एव उनका अदन-प्रदान भी कर सकेंगे । जापान के वैज्ञानिको ने Computers के विकास की इस योजना को किप्स (Knowledge Information Processing System) नाम दिया है यह माना गया है की इन Computers में दस अरब तार्किक अनुमतियाँ प्रति सेकंड (Logic Inference Per Second-LIPS) की क्षमता होनी चाहिए । इसके लिए उन्होंने 50 पैसे के सिक्के के बराबर चिप बना ली है, जिसमे 40 लाख पुस्तकों के बराबर जानकारी संगृहीत की जा सके ।

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